भीलवाड़ा। बाल दिवस के अवसर पर शहर के तमाम विद्यालयों में बाल दिवस बड़े धूमधाम से बनाया गया इस अवसर पर विद्यालयों के शिक्षकों ने बालकों को क्रीड़ा करवाई इस मौके पर बच्चों ने बड़े हर्ष के साथ कई साहसिक खेल खेले ब्लॉकों को मोबाइल में खेल नहीं खेलते हुवे साहसिक खेल खेलने चाहिए इसके लिए शिक्षकों ने छात्र छात्राओं को प्रोषाहित किया । भीलवाड़ा के बड़े सरकारी विद्यालय में भी प्रधानाचार्य श्याम लाल खटीक ने बालकों संदेश देते हुवे कहा कि वर्तमान काल की स्थितियों को देख कर चले तो हमें शिक्षा के प्रति बालक बालिकाओं को जागरूक होना पड़ेगा शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम हे जिससे बालकों का बौद्धिक शारीरिक नैतिक विकास हो पाएगा अपने जीवन काल में अच्छा जीवन जीना हे तो विधा को ग्रहण करना बेहद जरूरी हे हमें अच्छा मार्ग कोई दिखा सकता हे तो वह शिक्षा है। अभी की जनरेशन मोबाइल जैसे उपकरणों में लिप्त होती जा रही हे जिससे उनके बौद्धिक विकास में कमी होती जा रही पढ़ाई के दौरान बच्चों को मोबाइल से दूर रखना बेहद जरूरी हे जिससे वह अपने मार्ग से ना भटके। बच्चों की पढ़ाई में शिक्षक की जितनी भूमिका होती हे उससे कई अधिक अभिभावकों की भी जिम्मेदारी होती हे। अभिभावकों को भी समझना पड़ेगा कि बालकों के जीवन में मोबाइल सबसे ज्यादा घातक है। भीलवाड़ा के सर्वोदय स्कूल के वैभव बांगड़ ने कहा कि भारत को एक जगह से दूसरी जगह से ले जाने के शिक्षा अत्यधिक महत्वपूर्ण है शिक्षा से बच्चों का सर्वांगीण विकाश के लिए शिक्षा महत्व अधिक हे जिससे बालक अपनी पढ़ाई पूरी करके अपने जीवन सक्षम बना सकता हे। बच्चों के माता पिता की आशाएं और विश्वाश उनके बच्चों पर टिकी होती हे जब तक बालक शिक्षा ग्रहण नहीं करेगा तब तक उनका बौद्धिक विकास नहीं हो पाएगा।

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Pankaj Garg
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