बिजौलिया, बलवंत जैन। राजस्थान राज्य में राजस्व इकाइयों के पुनर्गठन को लेकर चल रही कवायद के बीच आशंका के चलते बिजौलिया उपखंड को मांडलगढ़ में विलय की चर्चाओं ने ऊपरमाल क्षेत्र के लोगों में पिछले पांच दिनों से आक्रोश अपनी चरम सीमा पर है। राजस्थान सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध स्थानीय बार एसोसिएशन ने इस निर्णय की लिखित कागजी जानकारी के बाद से सबसे पहले अपना विरोध खुलकर दर्ज करवाया है। बार एसोसिएशन अध्यक्ष सुमित जोशी के नेतृत्व में स्थानीय विभिन्न संगठनों के पदाधिकारीयो से बैठक कर आंदोलन को लेकर आगामी चर्चाएं भी की गई। इसी क्रम में बिजौलिया उपखंड कार्यालय को मांडलगढ़ में विलय होने से बचाने के लिए कल बार एसोसिएशन के आह्वान पर विभिन्न संगठनों के पदाधिकारीयो एवं स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर सैकड़ों की संख्या में उपखंड अधिकारी अजीत सिंह राठौड़ को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी दिया। ज्ञापन के माध्यम से स्थानीय लोगों ने उपखंड कार्यालय को बिजौलिया से मांडलगढ़ में विलय नहीं करने की मांग रखी गई। ज्ञापन में उपखंड विलय के पश्चात होने वाली दुविधाओं को लेकर निराशा बताई गई। इसी बीच विलय की जानकारी को लेकर जहां एक और बार एसोसिएशन कागजों में अंकित पुख्ता प्रमाण से आमजन को बिजौलिया उपखंड कार्यालय बचाने को लेकर एकजुट और जागरूक करने का प्रयास करते नजर आ रहे है। वही इस विषय को लेकर मांडलगढ़ विधायक गोपाल खंडेलवाल के द्वारा तीन दिनों पूर्व एक वीडियो के माध्यम से दिए स्टेटमेंट में इसे पूर्ण रूप से भ्रामक खबर बताया गया है। स्थानीय विधायक का इस विषय में कहना है कि राज्य सरकार के द्वारा इस प्रकार का कोई भी निर्णय मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र की जनता के विरुद्ध नहीं लिया गया है। विधायक के द्वारा बिजौलिया उपखंड कार्यालय को मांडलगढ़ में विलय नहीं होने देने की बात कही गई है। विलय की जानकारी के बीच स्थानीय विधायक एवं बार एसोसिएशन के द्वारा जारी किए अलग- अलग स्टेटमेंट ने स्थानीय लोगों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। बिजौलिया उपखंड कार्यालय के मांडलगढ़ में विलय होने के मामले में ज्ञापन देने गए स्थानीय लोगों के पक्ष में पूर्व प्रधान गोपाल मालवीय भी खुलकर सामने आए हैं। गोपाल मालवीय ने बिजौलिया उपखण्ड कार्यालय को मांडलगढ़ में विलय नहीं होने देने का लोगों को आश्वासन दिया। साथ ही कहा कि अगर भविष्य में सरकार के द्वारा अगर इस प्रकार का जन विरोधी निर्णय लिया जाता है तो वह आमजन के साथ मिलकर एक बड़ा आंदोलन सरकार के विरुद्ध खड़ा करेंगे। उपखंड विलय की खबर के बीच बार एसोसिएशन और विधायक के बीच किसका कथन सत्य प्रमाणित होता है यह तो भविष्य ही निर्धारित करेगा। किंतु बिजौलिया उपखंड कार्यालय अगर भविष्य में मांडलगढ़ में विलय होता है तो यह क्षेत्रवासियों के लिए सरकार का बहुत बड़ा अन्यायपूर्ण निर्णय साबित होगा। साथ ही इस निर्णय का खामियाजा वर्तमान भाजपा सरकार को आगामी चुनावो में देखने को मिलेगा।
Author: AKSHAY OJHA
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