भरतपुर। सुप्रीम कोर्ट से खनन को लेकर प्रदेश के 20 हजार से ज्यादा खानधारकों को फिर राहत मिली है। इनमें करीब 11 हजार खान संचालक एन्वायरमेंट क्लीयरेंस के लिए आवेदन कर चुके थे, लेकिन इन्हें क्लीयरेंस नहीं मिली। मगर 9 हजार के करीब खान संचालक तो ऐसे हैं , जो आवेदन ही नहीं कर सके । खास बात यह है कि इनमें करीब 7 हजार तो सिर्फ प्रदेश के तीन खनन क्षेत्रों के ही हैं। ये क्षेत्र जोधपुर, बालेसर तथा जैसलमेर हैं। जोधपुर में 4200, बालेसर में 2500 तथा जैसलमेर में 200 से ज्यादा खदानों के आवेदन बाकी हैं। जाहिर है कि इन्हीं तीन क्षेत्रों ही सबसे ज्यादा मजदूरों पर रोजगार का संकट मंडरा रहा था, लेकिन अब खदान संचालकों को तीन सप्ताह की मोहलत मिलने से इनका रोजगार सुरक्षित है। छोटे खान संचालक तो अधिकांश ज्यादा शिक्षित नहीं हैं। वे पांच साल की खनन कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं कर पाए थे। अब कोर्ट से राहत के बाद खान विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इन खान संचालकों की मदद करेंगे। ऑफिस 24 घंटे खुले भी रखे जा सकेंगे। ई–मित्र पर फार्म अपलोड होगा, लेकिन फार्म भरने में कर्मचारी मदद करेंगे। एनजीटी ने आदेश निकाला था कि जिन खान धारकों ने पूर्व में जिला स्तरीय पर्यावरण समिति से पर्यावरण स्वीकृति ली थी, उनको अब राज्य स्तरीय पर्यावरण समिति से स्वीकृति लेनी होगी। इसके लिए प्रत्येक खान धारक को माइनिंग प्लान बनाकर परिवेश पोर्टल पर फार्म- 2 अपलोड करना था।
जुलाई से प्रोसेस , नवंबर में लास्ट डेट
ईसी से जुड़ी कुल 23 हजार खदाने हैं। इनमें 3 हजार खान संचालकों ने पहले आवेदन कर दिए थे। उन्हें राज्य स्तरीय कमेटी से ईसी मिल गई। मगर 20 हजार खानों में खनन करना संकट में आ गया । ये आवेदन करते उससे पहले ही राज्य स्तरीय कमेटी भंग कर दी गई। ऐसे में इसी वर्ष जुलाई महीने में आवेदन भरने का काम शुरू हुआ। मगर समय काफी कम मिला। 7 नवंबर आखिरी तिथि थी। मगर इस तारीख तक आधे ही आवेदन हुए। ऐसे में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। अब वहां से दूसरी बार राहत मिली है।
खानधारक कम पढ़े लिखे आधार-फोन अपडेट नहीं
बालेसर में खानधारक प्रेमाराम माली ने बताया वह खान की ईसी के लिए कार्यालय गया। वहां बताया कि वह फोन साथ लेकर आओ जिसके आधार नंबर जुड़े हैं। ऐसे में पहले मोबाइल नंबर आधार सेंटर पर जाकर अपडेट कराया। फिर जोधपुर जाकर माइनिंग इंजीनियर से माइनिंग प्लान बनवाया। फिर ई मित्र पर जाकर माइनिंग प्लान अप्रूवल की पांच हजार रुपए की रसीद कटवाई। ये सभी कागजात जाकर खनिज विभाग कार्यालय में दिए। वहां पर 3 घंटे तक फार्म भरने तक वहां पर बैठना पड़ा क्योंकि खान से संबंधित कई जानकारी पूछी। ओटीपी बताई तब जाकर मेरा फार्म भरा जा सका। उसकी भी ईसी जारी नहीं हो पाई। ऐसे बहुत से खानधारकों का मोबाइल-आधार नंबर तक अपडेट नहीं होने से फार्म अटक गए।



