खसरा संख्या 108,109,रकबा 1 बिधा 16 बिस्वा भूमि बगीचे व बिलानाम भूमि का कब्जा मे अंबे माताजी की भूमि माताजी के नाम करनी चाहिए
शहर के भूमाफियाओ ने 1 बिधा 16 बिस्वा भूमि अंबे माताजी की जमीन पर कब्जा कर लिया है
शहर के करोड़ों की भूमि पर अतिक्रमण करवाकर चार दिवारी कर दी है ईसमे जो कुआँ व पानी का अवाडा को खुल्ला कर पशुओं व गाँव के लोगों के लिए पिने के पानी की व्यवस्था करनी चाहिए
इसभूमि पर से कब्जा हटाकर अंबे माताजी की धर्मशाला बनाने की स्वीकृति प्रदान करावे
शिवगंज। शहर के अंबे माता मंदिर की बगीचे की भूमि पर कुछ धंना सैठो व माने हुए भूमाफियाओ ने कब्जा कर रखा है। यह भूमि शिवगंज शहर के राजस्व खसरा संख्या 108 व खसरा संख्या 109 जो एक बिधा 16 बिस्वा भूमि है। यह भूमि आज करोड़ों रुपए की है। धन्ना सैठो ने अपनी नजर इस भूमि पर डालकर अंबे माताजी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है अंबे माताजी की भूमि जो इस भूमि से आय होती थी। उस मंदिर की पूजा वह पुजारी का घर खर्च चलता था वह शहर के कुछ सेठ लोग मिलकर वह मंदिर के कुछ नेताओं ने मिलकर यह भूमि आगे के आगे बिकवा दी गई है। जो नहीं हो सकता वह भी हो रहा है इसमें खुलेआम लोकायुक्त जयपुर में मामला विचाराधीन चल रहा है उस पर जिला कलेक्टर महोदय ने इस पर से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था उपखंड अधिकारी शिवगंज वह तहसीलदार महोदय ने सब निर्देश दिया था कि यह अतिक्रमण हटाया जाए जमीन पर से जिसका भी अतिक्रमण है वह ध्यान नहीं दिया प्रशासन ने किया जाए पर सैठो के आगे सब मस्तक है क्योंकि शहर के बीच में यह भूमि है वह यह भूमि और यह भूमि करोड़ो रूपये की आज के हिसाब से है इसी के एक तरफ बहार नगर पालिका के कैबिन उन्हें भी इन लोगों ने खरीद लिया जो सरकारी केबिन खरीद नहीं सकते पर करें क्या मजबूर है। यह सब लोग क्योंकि प्रशासनिक इनके आगे नतमस्तक्त है तो जनता क्या करेगी जनता सिर्फ लड़ सकती है। यहीं से राजस्व रिकॉर्ड में है शिवगंज के राजस्व निरीक्षक के द्वारा इस पर के कही बार फर्जी रिपोर्ट पेश की गई थी उसके बाद भी प्रशासन में कोई कार्रवाई नहीं की वह आज भी यह सेठ लोग कब्जा करके बैठे हुए अंबे माता मंदिर के नवरात्रि में डांडिया रास कार्यक्रम के लिए वह जगह छोटी पड़ रही है।
हमें अंबे माताजी की जमीन होने के बाद भी यहां पर डाडिया राज नहीं कर सकते क्योंकि सरकारी अधिकारियों ने इन सैठो को संरक्षण दे रखा है इस जमीन के ऊपर से अतिक्रमण नहीं हटाना अंबे माता मंदिर के साथ धोखा कर रही है पर अंबे माता इनको माफ नहीं करेगी पर शहर की जनता अब बड़ा आंदोलन करेगी नहीं तो मजबूर होकर हमें कुछ बुरा करना पड़ेगा या उच्च न्यायालय का सहारा लेना पड़ेगा तब जाकर अतिक्रमण हटेगा अंबे माता के मंदिर की भूमि जो बगीचे के नाम से आरक्षित थी कुए के नाम से भी थी जो आज भी है राजस्व रिकार्ड में यहां पर पूर्व में एक बड़ा कुआं वारा पशुओं के पानी पीने के लिए बना हुआ था। उसको भी इन्होंने अंदर कब्जे में लेकर दीवारों में बंद कर दिया इसे खुलवाकर वापस पशुओं के लिए आसपास मे बनाने वाले लोगों के लिए पानी की व्यवस्था करवानी चाहिए। वह राजस्थान सरकार के मंत्रीजी देवस्थान विभाग जोरारामजी कुमावत से विशेष अनुरोध है कि यह अंबे माताजी की बगीची इन शहर के बड़े भूमाफियाओ से कब्जे से मुक्त करवा कर यह भूमि अंबे माताजी के नाम करके कब्जा कास्ट दिलवाया जाए तब जाकर अंबे माता को न्याय मिलेगा वह स्थानीय सिरोही विधायक माननीय राज्य मंत्री ओटारामजी देवासी के क्षेत्र में यह अंबे माताजी का मंदिर आया हुआ है।
ओटाराम देवासी की सरकार है अब वह अब अंबे माता को राहत नहीं मिलेगी तो क्या कांग्रेस के राज में मिलेगी कांग्रेसी तो देवी देवताओं के खिलाफ होते यह लोग मद्रसो के लिए जमीन दे देते हैं पर मंदिरों को देने में पीछे रहते हैं। अनुदान भी अगर दे तो कभी मस्जिदों के नाम दे देंगे पर मंदिरों के नाम नहीं यह भूमि मंदिर के लिए आरक्षित है। उसके बाद भी इसका कब्जा मंदिर को नहीं दिया जा रहा है बड़ी शर्म की बात है पूर्व में आदेश भी हो रखें पर सरकारी अधिकारी आदेश की पालना नहीं कर रहे हैं। तुरंत कार्यवाही कर यह भूमि वापस मंदिर के नाम दी जाए वही यहां पर बड़ी धर्मशाला वह डांडिया रास करने के लिए अलग रखी जाए की जनता खुश होगी वह अंबे माता शहर का उद्धार करेगी। इसीलिए शिवगंज शहर का मंदिर है वह मंदिर की भूमि पर कब्जा करना इसका नतीजा शहर के व्यापारी भुगत रहे नहीं तो शिवगंज कहां था जिसे मिनी मुंबई कहा जाता था जो अब सुमेरपुर कहां तक पहुंच गया आप स्वयं देख लो शिवगंज की माताजी अंबे माताजी इसकी भूमि पर ही शहर के सेठ लोग कब्जा कर जमीन खाने की कोशिश कर रहे हैं पर माताजी कभी सफल नहीं होने देगी यह भूमि बडी है तीनों तरफ राजस्व रास्ता हैं और पालिका प्रशासन के अंधे पन से अंबे माताजी की भूमि पर कब्जा कर शादी के पैसा वसूल रहे है अब तक लाखों रूपये वसूल कर चुके है।
प्रशासन कारवाई क्यू नही करते है
शिवगंज शहर के खसरा संख्या 108,109 1 बिधा 16 बिस्वा भूमि अंबे माताजी मंदिर शिवगंज इसका लोकायुक्त महोदय के आदेश पर जिला कलेक्टर व उपखंड अधिकारी कार्यालय से पञ जारी कर तुरंत अतिक्रमण हटाना का आदेश दिया था। भष्ट्राचारीओ ने नही अतिक्रमण हटाया नही कारवाई की क्यू की यह अधिकारी इन धन्ना सैठो के धन के गुलाम होने से भूमाफियाओ को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रहे है। वह शिवगंज नगर पालिका क्षेत्र के राजस्व खसरा नंबर 108 ,109 सरकारी बिलानाम भूमि है। 1 बीधा 16 बिस्वा भूमी है जो अंबे माता बगीचे के नाम से आरक्षित थी अंबे माता मंदिर के नीचे यह भूमि एक बिधा 16 बिस्वा भूमि जो करोड़ों रुपए की है इस पर शहर के सैठो ने कब्जा कर रखा है। पालिका प्रशासन सैठो के आगे नतमस्तक्त है नहीं तो अतिक्रमण हटवा सकते है। तुरंत हटाकर वहां पर गायों के पीने के लिए पानी की व्यवस्था की जाए वह डांडिया रास कार्यक्रम के लिए नवरात्रि में खुली रखी जाए वह शहर की भूमि अंबे माताजी के नाम पर की जाए।
सीमा देवी माली पूर्व पार्षद नगर पालिका शिवगंज
शिवगंज नगर पालिका क्षेत्र में खसरा संख्या 108,109 रकबा 1बिधा 16 बिस्वा भूमि बगीचे व बिलानाम भूमि पर कब्जा कर लिया है। भूमाफियाओ अंबे माताजी व नगरपालिका शिवगंज की जमीन पडी है। जो इस पर से अतिक्रमण मुक्त करवाकर अंबे माताजी की भूमि पर धर्मशाला का निर्माण स्वीकृति प्रदान करावे व बगीचे मे कुआँ व अवाडा को ओपन कर पशुओं व गाँव के लोगों के लिए पिने के पानी की वयवस्था करनी चाहिए। तब जाकर शिवगंज शहर की जनता को राहत मिलेगी और अंबे माताजी के भक्त व पुजारियों को राहत मिलेगी क्यू की ईस बगीचे मे शादी व अन्य कार्यक्रम करने से पैसा की आय होगी। जिससे मंदिर के पुजारी व मंदिर व्यवस्थापक मजदूरों की मजदूरी देने मे आय होगी जिला कलेक्टर व उपखंड अधिकारी ने अतिक्रमण हटाने का आदेश देने के बाद भी आज तक कोई कारवाई नही हुई अब प्रशासन को कारवाई करनी चाहिए नही तो करोडों की अंबे माताजी की जमीन अरबों रुपये मे बेचकर चले जाएँगे फिर माताजी की भूमि पर से अतिक्रमण मुक्त करवाकर वहा पर अंबे माताजी की धर्मशाला बनाई जाएँ जिससे माताजी के आने वाले नवराञी मे डांडिया रास कार्यक्रम किया जा सके।
कमलसिह चौहान समाजसेवी गौरक्षक शिवगंज
शहर की सबसे पहले शिवगंज बचने से पूर्व अंबे माता मंदिर के बगीचे की भूमि पर शहर के भूमाफियाओ ने फर्जीवाडा कर अपने नाम का पट्टा बनाने की कोशिश की गई या बना भी दिया होगा क्योंकि पुराना पट्टा इसमें बगीचा अंबे माता का लिखा हुआ था। इस बगीचे की आय से अंबे माता पुजारी का खर्चा वह माताजी की पूजा होती थी पर माताजी भी भूमाफियाओ के आगे चुप है। जब अंबे माता की जमीन कोई खाएगा तभी पर्ले आएगा कब्जा करने वालों का नाश होगा। वह जिसने भी आगे अपने नाम की करने की कोशिश की है वह की है उन सभी का सत्यानाश होना निश्चित है क्योंकि अंबे माता किसी को नहीं छोड़ती इस माताजी की जमीन अपने भक्तों के लिए धर्मशाला वह डांडिया रास के लिए आरक्षित रखी गई थी। जमीनों के भाव आसमान में होने से भूमाफिया की नियत खराब हो गई और इस पर कब्जा कर लिया शहर के कुछ गुलाम लोगों की वजह से यह जमीन पर लोगों ने कब्जा कर इस जमीन की कमाई खाकर अपना गुजारा कर रहे पर माताजी का खाना उनका सत्यानाश का कारण हो सकता है।