अब तिलक नगर योजना में बड़ा मुआवजा बांटने का आया घोटाला और भ्रष्टाचार के प्रकरण…? जिम्मेदार अधिकारियों ने साधी चुप्पी, क्या है इसके पिछे अदृश्य कारण, कौन-कौन दलाल, सफेदपोश, भू-कारोबारी है शामिल…?
ना गलत मुआवजा देने का, ना ही मुआवाजे व अन्य पत्रावलीयां खोने का मुकदमा दर्ज करा रही यूआईटी, आखिर किसको बचाने का है प्लान…??
नगर विकास न्यास के घोटाले के पीछे आखिर कौन है सफेदपोश, भू-कारोबरी, दलाल, अधिकारी कर्मचारी जिम्मेदार, कैसे बन गए यूआईटी के कर्मचारी अरबपत्ति…….?
सरकार से बड़े कैसे हो गए यूआईटी भीलवाड़ा के अवैध भू कारोबारी और भू माफिया, सफेदपोश, दलाल, अधिकारी और कार्मिक, यह कब जाएंगे सलाखों के पीछे…..?
भीलवाड़ा। तिलक नगर योजना में राजस्व ग्राम भीलवाड़ा की आराजी नम्बर 1659,1661,1662,1665,1666 कुल रकबा चार बीघा जो नगर विकास न्यास भीलवाड़ा द्वारा अवाप्त कर प्रकरण संख्या 390/91 निर्णय दिनांक 26.08.1994 को किया गया। इसमें न्यास के भ्रष्ट अधिकारी व कार्मिक, दलालों, भू-कारोबारियों ने अपनी दूषित कार्यकलापो व दस्तावेजातों के चलते अपनी पुर्ति हेतु मिलीभगत कर 15 प्रतिशत का मुआवजा दिया गया। मौका स्थिति पर नगर विकास न्यास भीलवाड़ा का एक इंच भी कब्जा नही होकर खातेदार को प्रतिफल स्वरूप मुआवजा गलत भ्रामक व दूषित कृत्यो व कूट रचित दस्तावेजातो व अदश्य कारणो के चलते दिया गया। क्योकि मुआवजा देते वक्त न्यास के अधिकारी व कार्मिको यह भलीभाति ज्ञात था कि मुआवजा तो गलत व बेबुनियाद है लेकिन मुआवजा देने पर अधिकारी व कार्मिको की लिप्त भुकारोबारीयो व भुमाफियाओं कि सांठ-गांठ के चलते अदृश्य बड़ी पुर्ति हो रही थी। उपरोक्त आराजियत नियमन कर पुर्व में ही आवाप्ति न्यास द्वारा कर ली गई थी
परन्तु पहले से ही खतेदार द्वारा कृषि भूमि पर कृषि भूखण्ड काट कर विक्रय कर दिये थे। इन सभी काटे गए कृषि भूखण्ड़ों पर मकान बने हुए थे। जिसके बाद भी नियमन कर जमीन न्यास के नाम हो चुकी थी, व अवार्ड संख्या 390/91 दिनांक 18.01.2023 में न्यास द्वारा उक्त कृषि भूमि का पुनः मुआवजा दिया गया। न्यास भीलवाड़ा के अन्दर मुआवजे के बडे़-बडे़ भ्रष्टाचारी कांड वेसे तो वर्ष 2011 से ही हो रहे है लेकिन बड़ी विडम्बना यह है कि वर्ष 2019 से लगाकर वर्ष 2023 तक न सोचने वाले मुआवजे, फर्जी पट्टे इत्यादि बनवाने व क्रियानवित कराने में कोन कोन भू-माफिया, भू-कारोबारी, दलाल न्यास के अधिकारी व कार्मिक शामिल है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा न्यास भीलवाड़ा में अनुमानित यह तीसरी कार्यवाही है लेकिन ऐसा क्या अदृश्य कारण है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अपने अन्तिम पडाव तक पहुचते पहुंचते शून्य हो जाता है इससे ऐसा प्रतित होता है कि जॉच एजेन्सीयों से ज्यादा बलशाली व रसुकदार भू-माफिया, भू-कारोबारी, दलाल, सफेदपोश व न्यास के अधिकारी और कार्मिक है। जिसके चलते किये कृत्यों को छुपाने के लिये जांच एजेन्सीयों की कार्यवाहीयो को भी विराम लगा देते है……? सबसे बडी विडम्बना यह है कि किये गए भ्रष्टाचारी कार्यों कि पत्रावलियां न्यास भीलवाड़ा के रिकार्ड से गायब होने के बाद व दिखती हानि सरकार के राजकोष को पहुंचाने के बाद भी क्यो निवर्तमान व वर्तमान अधिकारी एफआईआर दर्ज कराने से डरते व कतराते है जिसके चलते रसुकदार भू-माफिया, भू-कारोबारी, दलाल, न्यास के अधिकारी व कार्मिक के होसले बुलन्दीयों पर होकर अल्प समय में ही अकूक सम्पति के मालिक हो गये जिससे आमजन को तो कार्य करवाने में चक्कर पे चक्कर लगाने पडते है फिर भी कार्य नही होता है, लेकिन भू-कारोबारीयों और भू-माफियाओं का क्षणिक समय में काम हो जाता है। कृषि भूमि आराजी नम्बर 1659,1661,1662,1665,1666 कुल रकबा चार बीघा के प्रतिफल स्वरूप न्यास ने तिलक नगर के मुख्य मुख्य मार्गो पर बडी बडी रोडो पर बेशकिमती कोर्नर के बड़े- बडे भूखण्ड दिये जिनकी संख्या कुल 05 है सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार नाम न बताने की स्थिति में दिए गए मुआवजे के 05 भूखण्डो में से दो भूखण्डो की रजिस्ट्री उप पंजीयत भीलवाड़ा के यहा हुई थी। सूत्रों का तो यहा तक कहना है कि न्यास के अधिकारी व कार्मिको की मन चाही अदृश्य लाभ पुर्ति न होने से न्यास के उच्च अधिकारीयों व लिप्त कार्मिकों को मालूम चलते ही प्रकरण एफआईआर दर्ज करा रजिस्ट्री निरस्त करवा दी। लेकिन जो बडा बेशकीमती मुआवजा खातेदार को दिये जा चुका था उसकी वसूली की कोई कार्यवाही नही कि गई क्यो इसके पिछे क्या बडा अदश्य राज था जो कि एक जांच का बहुत बड़ा विषय है।
खतेदार भगवती उर्फ बागो पुत्री गजान्नद माली जिसका मुखतियार नामा आम राजेश कुमार शर्मा पुत्र बंसती लाल शर्मा को निम्न भूखण्ड दिये थे।
- 3-ए-1 साईज 3989 (कोर्नर), 02. 3-ए-29 साईज 39089 (कोर्नर), 03. 6-एफ-1 साईज 39169 (कोर्नर) व अन्य भूखण्ड़ दिए गए। इस संदर्भ में मिली सुत्रों से जानकारी अनुसार भगवती उर्फ बागो सामिपुत्री गजान्नद माली नाम कि कोई वारिसान थी ही नहीं फिर भी किस रसुकदार भू-माफियां, भूकारोबारी, दलाल, न्यास के अधिकारी व कार्मिक ने सरकार के कोष को हानि पहुचाने के लिये व अपनी पुर्ति करने के लिए इतना बड़ा भ्रष्टाचारी कारनामे को अंजाम दिया। अंजाम में कौन-कौन दलाल, भू-कारोबारी, अधिकारी, कार्मिक सलिप्त थे क्यों नहीं समय रहते एसे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई की गई कार्रवाई न कराने के पिछे अदृश्य रूप से कौन-कौन थे यह एक बहुत बड़ी जांच का विषय है साथ ही यहा यह कहावत भी लागू होती है कि भय सैया कोतवाल तो डर काहे का..?
बेशकिमती कृषि पर बसी कॉलोनी का दिया बड़ा बेशकिमती मुआवजा… राजकोष को पहुचायां नुकसान…???
नगर विकास न्यास द्वारा राजस्व ग्राम भीलवाड़ा की आराजी संख्या 2214, 2215, 2216, 2217 कुल रकबा 5 बीघा तीन बिस्वा का 1/2 हिस्सा खातेदार धर्मेन्द्र सिंह शक्तावता पुत्र शिव सिंह शक्तावत का था जिन्होंने पूर्व में कृषि भूमि पर कृषि भूखण्ड विक्रय कर दिए थे और उन पर मकान बने होने के बावजूद। नगर विकास न्यास से अवार्ड संख्या 129/91 दिनांक 30.01.2024 को पारीत करा कर मुआवजे के रूप में भूखण्ड संख्या 4-जे-43, 4-जे-44 क्षेत्रफल एक भूखण्ड का 3989 था जिनका कुल क्षेत्रफल 6 हजार 942 वर्ग फुट था जो मुआवजे के रूप में लेकर (अ) अर्पित पुत्र श्याम सुन्दर (ब) गोपाल झवर पुत्र प्रहलाद झवर (स) नरेन्द्र राठी पुत्र बालमुकन्द राठी को भूखण्ड संख्या 4-जे- 43 का दिनांक 15.12.2023 को जरीए पंजीकृत बैचान कर दिया। भूखण्ड संख्या 4-जे-44 का धर्मेन्द्र सिंह शक्तावता पुत्र शिव सिंह शक्तावत द्वारा (अ) अर्पित बिडला पुत्र बालूराम बिडला (ब) कैलाश बद्रीलाल काबरा पुत्र बद्रीलाल जगन्नाथ काबरा (स) राकेश राठी पुत्र दामोदर राठी को कर दिया लेकिन राजस्व रेकॉड में अवाप्त भूमि नगर विकास न्यास के नाम इन्द्राज होने के बावजूद भी भौतिक कब्जा न्यास नहीं ले पाया है और मुआवजा जारी कर दिया है। ऐसा क्यों व किन कारणों से किया गया इसके पिछे कौन कौन है। जाँच करा कड़ी से कड़ी विधि कार्रवाई क्यों नहीं की गई…? उक्त मुआवजा देने का सबसे बढ़ा कारण है कि मौके पर एक इंच भी जगह नहीं होने से कृषि भूमि के मलिक द्वारा कृषि भूखण्ड काट दिए और वहा पर मकान बन गए के पश्चात् मुआवजे की फाईल नगर विकास न्यास में लगाई गई और बेचे कृषि भूखण्ड़ों को मुआवजा उठा लिया गया जो कि एक राज्य सरकार के साथ धोखाधड़ी का कृत्य है इस मुआवजे को स्वीकृत कराने के लिए नगर विकास न्यास के किस किस अधिकारी ने किस किस कार्मिकों के जरिए हस्ताक्षर कर भुगतान किया और मुआवजा स्वीकृत कराने में भीलवाड़ा के कौन कौन दलाल व सफेद पोश सामिल है। जो एक बहुत बड़ा रहस्यमही विषय है और यह बताता है कि नगर विकास न्यास में इस तरह के दूषित और भ्रष्टाचारी कृत्य कितने लम्बे समय से चल रहे है। जिससे सरकार के राजस्व को बड़ी हानी हो रही है और इस तरह की कई पत्रावलियां भी गायब है जिसके लिए भी संबंधित आलाअधिकारी व कार्मिक मौनमुख दर्शक बने हुए है…?